Sunday, November 10, 2013

कोई मुझसे भी अच्छा मिल गया तो

उसे पाने की करते हो दुआ तो 
मगर उस से भी कल जी भर गया तो 
यक़ीनन आज हम इक साथ होते 
अगर करते ज़रा सा हौसला तो 
चले हो रहनुमा कर, इल्म को तुम 
तुम्हेँ इस इल्म ने भटका दिया तो 
समझ सकते हो क्या अंजाम होगा 
तुम्हारे वार से वो बच गया तो
 बहोत मसरुफ था महफ़िल मेँ माना 
नहीँ कुछ बोलता पर देखता तो
 किसी को चाहती है पूछ लूँ क्या 
जवाब इसका मगर हाँ मेँ मिला तो
 मैँ अच्छा हूँ तभी अपना रही हो 
कोई मुझसे भी अच्छा मिल गया तो 
बहोत नज़दीक मत आया करो तुम 
कहीँ कुछ हो गयी हमसे ख़ता तो 
बहोत से काम कल करने हैँ मुझको 
मगर अय ज़िन्दगी कल न हुआ तो 
ग़ुलामी मेँ जकड़ लेगा कोई फिर 
वतन ऐसे ही गर लुटता रहा तो 
मुझे फिर कौन मारेगा बताओ
 ग़मे हिज्राँ ने भी ठुकरा दिया तो

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